झूठी बदनामी के डर से सच्चाई को कभी नहीं छुपाना चाहिए

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1902

एक चतुर व्यापारी की प्रेरक कहानी

चतुर सुरमें का व्यापारी

बड़ी सी झील के पास एक छोटा सा खुबसुरत गाँव था, इसके पास में ही एक बड़ा सा शहर भी था, गाँव के लोग शहर में जा कर व्यापार किया करते थे, इसी से उनका गुजरबसर होता था. शहर में कई अमीर-अमीर व्यापारी रहते थे, जो पीढ़ी दर पीढ़ी इसी धंधे में हैं. वहीं गाँव में भी यही हाल है, लोग यहाँ अपने पूर्वजों के व्यापार करते हैं.

उसी गाँव में एक रामू नाम का एक कोयले का व्यापारी रहता था, वो शहर में कोयला बेचा करता था, उसका एक लड़का था, जिसका नाम रवि था, जो बहुत ही चालाक था. लेकिन उसकी चालाकी उसके बाप के सामने नही चलती थी. रवि इतना ज्यादा चालाक था कि पीतल को सोना बना कर भी बेच दें. और तो और मिटटी को भी सोने के दाम में बेच दे. रवि का कहना था कि जिन्दगी भर कमाने से अच्छा है कि एक बार ही कमा लो. रामू अपनी बेटे की ऐसी हरकतों से बेहद परेशान रहता. रवि अपने बाप की बात मानता था, लेकिन अपनी आदत से मजबूत था.

एक दिन रवि का बाप रामू की बहुत ज्यदा तबियत ख़राब हो गई. रामू ने अपने बेटे रवि को बुलाया और बोला कि कोयले का व्यापार हमारे पूर्वजों का है, इसे आंगे तुमने ही संभालना है, इसे ख़राब मत करना. फिर एक दिन रामू की मृत्यु हो गई. कोयले का सारा काम अब रवि के हांथो पर आ गया था. वो सुबह कोयले की बोरियां शहर लेकर जाता और वहां धुप में घूम घूम कर बेचा करता था. उसे इस काम में बहुत मेहनत लगती थी. एक दिन वो शहर में कोयला बेच रहा था, तभी उसे पता चाल कि शहर में किसी सेठ के घर पर जमीन में गडा हुआ बहुत सारा सोना निकला है, जो उसके पूर्वजों से किसी ज़माने में चोरी के डर से जमीन में गाड़ दिया था.

उसी समय रवि के दिमाग में एक बहुत ही अच्छा विचार आया और वो वापस अपने गाँव आ गया. उसने गाँव के दर्जी से अफगान के शेख वाली पोशाक सिलवाई, और कोयले को सुरमें की तरह महीन पीस लिया और उसे चमकीली सुरमें की सीसी में भर दिया. उसने शहर के व्यापारियों के कानों में ये बात पंहुचा दी कि अफगान से एक सुरमे का व्यापारी आया हुआ है, उसका सुरमा लगते है, पूर्वज दिखने लगते हैं और अगर उन्होंने जमीन में धन गाड़ा होगा तो वो बता देते हैं. शहर का एक व्यापारी बहुत ही लालची था, जब उसके कानों में ये बात पहुंची तो उसने अफगान के व्यापारी से संपर्क किया और उससे सुरमा खरीदने के लिए मोल भाव करने लगा. दो हजार में एक सीसी का सौदा पक्का हो गया, लेकिन व्यापारी भी बेहद चालाक था, उसने उस व्यापारी से कहा, कि पहले मैं ये सुरमा लगाऊंगा और जब मुझे मेरे पूर्वज दिखाई देंगे तभी मैं तुम्हे पैसे दूंगा, रवि तो उससे भी चालाक था, उसने बोला कि ठीक है, आप अपने सभी वयापारी मित्रों को बुला लीजिये, सबके सामने ये बात पक्की हो जाएगी. थोड़ी ही देर में शहर के करीब करीब सभी व्यापारी वहां आ गए,
रवि ने एक और चालाकी कि उसने सभी व्यापारियों को संबोधित करते हुए बोला, ये व्यापारी भाई मेरा सुरमा लगायेंगे और अपने पूर्वजों से बातें करेंगे, लेकिन अगर ये अपनी मां बाप की असली औलाद होंगे तभी उसने अपने पूर्वज दिखाई देंगे, मुझे उम्मीद है, कि ऐसा नहीं होगा.

व्यापारी पहले ये बात समझ नही पाया और जल्दी से सुरमा लगा लिए और अपनी आंखे बंद कर लिया. रवि ने फिर से अपनी बात दोहराई.

व्यापारी को सुरमा लगाने के बाद कोई भी पूर्वज नहीं दिखा था, लेकिन वो ऐसा बोल नहीं सकता था, इसे उसकी बहुत बदनामी होगी. वो रवि की चालाकी समझ गया था, व्यापारी से अपनी आंखे खोली और बोला कि मुझे मेरे पूर्वज दिखाई दिए. इसके बाद शहर के सभी व्यापारियों ने रवि से वो सुरमा खरीद लिया और रवि भी जल्दी से वहां से रफूचक्कर हो गया. रवि ने बहुत सारा धन कमा लिया था. और अपनी बदनामी की डर से उस व्यापारी से अपने साथी व्यापारियों को भी ठगवा दिया था.

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